कर्नाटक निकाय चुनाव के नतीजे आने शुरू हो गए हैं. राज्य की 105 निकाय सीटों के 2709 वार्डों पर नतीजे घोषित किए जा रहे हैं. अभी तक सामने आए नतीजों में कांग्रेस ने काफी बड़ी बढ़त बना ली है.
अभी तक 2709 वार्डों में से कुल 2338 वार्ड के नतीजे सामने आए हैं. इनमें से कांग्रेस ने 870, बीजेपी ने 815 और जेडी (एस) ने 307 सीटों पर जीत दर्ज की है. इनके अलावा 277 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है.
विधानसभा चुनाव के बाद एक बार कांग्रेस और जेडीएस एक
दूसरे के खिलाफ लड़े हैं. यही वजह है कि निकाय चुनाव में कांग्रेस, बीजेपी
और जेडीएस के बीच कांटे का मुकाबला है. बता दें कि 31 अगस्त को निकाय
चुनाव के लिए वोट डाले गए थे.
इन सभी सीटों के निकाय चुनाव के वार्ड के लिए 8,340
उम्मीदवार थे. वहीं कांग्रेस के 2,306, बीजेपी के 2,203 और 1,397 जेडीएस के
थे. इन चुनावों में EVM का इस्तेमाल किया गया था.
दिलचस्प बात ये है कि इस चुनाव में कई उम्मीदवारों को
पार्टियों ने टिकट नहीं दी थी इसलिए वह निर्दलीय चुनाव लड़े थे. ऐसे में इन
निर्दलीय के नतीजे भी बहुत मायने रखेंगे.
बता दें कि 2013 के निकाय चुनाव में 4976 सीटों में से
कांग्रेस 1960 सीटें जीती थी. जबकि बीजेपी और जेडीएस ने 905 सीटों पर जीत
हासिल की थी. इसके अलावा 1206 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज
करने में सफल थे.
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी नहीं रहे.
उन्होंने एम्स में गुरुवार को 5 बजकर 5 मिनट पर अंतिम सांस ली. 93 साल के
वाजपेयी लंबे वक्त से बीमार थे और 2009 से व्हीलचेयर पर थे. उनके पिता
पंडित कृष्णबिहारी वाजपेयी टीचर थे और मां कृष्णा देवी घरेलू महिला थीं.
अटल जी के परिवार में उनके माता-पिता के अलावा तीन बड़े भाई अवधबिहारी, सदाबिहारी और प्रेमबिहारी वाजपेयी और तीन बहनें थीं. उनकी
प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिक्षा मंदिर, बाड़ा में हुई. इसके अलावा अटल जी
के ग्वालियर में कई रिश्तेदार हैं. इनमें भतीजी कांति मिश्रा और भांजी
करुणा शुक्ला हैं. वहीं, ग्वालियर में अटल जी के भतीजे दीपक वाजपेयी और
भांजे सांसद अनूप मिश्रा हैं.
हालांकि, अटल बिहारी वाजपेयी आजीवन अविवाहित रहे.
लेकिन, 1998 में जब वे 7, रेसकोर्स रोड में रहने पहुंचे तो उनकी दोस्त
राजकुमारी कौल की बेटी और उनकी दत्तक पुत्री नमिता और उनके पति रंजन
भट्टाचार्य का परिवार भी साथ रहने आया. राजकुमारी कौल के बारे में बताया
जाता है कि जब अटल प्रधानमंत्री थे तब कौल वाजपेयी के घर की सदस्य थीं.
उनके निधन के बाद वाजपेयी के आवास से जो प्रेस रिलीज जारी की गई थी, उसमें
उन्हें वाजपेयी के घर का सदस्य संबोधित किया गया था.
साल 2004 के लोकसभा चुनाव में अटल बिहारी वाजपेयी की
तरफ से जमा किए गए शपथ पत्र के अनुसार अटल के नाम कुल चल संपत्ति
30,99,232.41 रुपये थी. वहीं पूर्व प्रधानमंत्री होने के नाते 20,000 रुपये
की मासिक पेंशन और सचिवीय सहायता के साथ 6000 रुपये का कार्यालय खर्च भी
मिलता था.
यदि अटल जी की अचल संपत्ति की बात करें तो 2004 के शपथ
पत्र के अनुसार उनके नाम पर दिल्ली के ईस्ट ऑफ कैलाश में फ्लैट नं0 509 है.
जिसकी 2004 के समय कीमत 22 लाख रुपये थी. वहीं अटल जी के पैतृक निवास
शिंदे की छावनी कमल सिंह का बाग की 2004 के समय कीमत 6 लाख रुपये थी. इस
तरह 2004 के शपथ पत्र के लिहाज से अटल जी की कुल अचल संपत्ति 28,00,000
रुपये थी.
हालांकि, अभी अटल
जी की वसीयत सामने नहीं आई है लेकिन साल 2005 में संशोधित हिन्दू
उत्तराधिकार कानून के अनुसार यह संपत्ति उनकी दत्तक पुत्री नमिता और दामाद
रंजन भट्टाचार्य को मिलने की उम्मीद है.
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